मल्टीपल स्केलेरोसिस के अनदेखे लक्षण और बेहतर जीवन जीने के अद्भुत रहस्य

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मल्टीपल स्क्लेरोसिस (MS) एक ऐसी बीमारी है जिसके बारे में सुनकर कई बार मन घबरा जाता है। यह हमारे शरीर के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र यानी दिमाग और रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करती है, और सच कहूँ तो इसकी वजह से ज़िंदगी थोड़ी मुश्किल ज़रूर हो सकती है। मैंने खुद ऐसे कई लोगों से बात की है जिन्होंने इस बीमारी का सामना किया है, और उनका अनुभव बताता है कि जानकारी और सही देखभाल से इस चुनौती को काफी हद तक संभाला जा सकता है। यह ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें हमारी अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से नसों को ढकने वाले सुरक्षात्मक आवरण (माइलिन शीथ) पर हमला कर देती है। जब यह माइलिन क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो दिमाग और शरीर के बाकी हिस्सों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान ठीक से नहीं हो पाता, जिससे कई तरह के लक्षण सामने आते हैं। मुझे याद है, एक बार एक महिला ने बताया कि कैसे उन्हें अचानक एक आँख से दिखना कम हो गया था, और शुरुआत में उन्हें समझ ही नहीं आया कि क्या हो रहा है। यह मल्टीपल स्क्लेरोसिस के लक्षणों की पहचान करना कितना ज़रूरी है, इसका एक बेहतरीन उदाहरण है।

मल्टीपल स्क्लेरोसिस के अनजाने पहलू: शरीर में क्या-क्या बदलता है?

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पहचानने में मुश्किल होने वाले शुरुआती संकेत

मल्टीपल स्क्लेरोसिस के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं, और यही इसे समझना थोड़ा मुश्किल बना देता है। मेरा अनुभव कहता है कि कई बार लोग इन लक्षणों को थकान या सामान्य कमजोरी मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। मुझे एक बार एक व्यक्ति ने बताया था कि उन्हें चलते हुए अचानक संतुलन बिगड़ने लगा था और पैरों में अजीब सी सुन्नता महसूस होती थी, जैसे कि चींटियाँ चल रही हों। ये दरअसल मल्टीपल स्क्लेरोसिस के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। कभी-कभी गर्दन को आगे झुकाने पर बिजली के झटके जैसा एहसास होता है, जिसे लेर्मिट साइन कहते हैं। आँखों से जुड़ी दिक्कतें भी आम हैं – जैसे धुंधला दिखना, दोहरी दृष्टि, या कभी-कभी एक आँख से पूरी तरह या आंशिक रूप से दिखाई न देना, और पलक झपकने पर दर्द भी हो सकता है। इसके अलावा, लगातार थकान, बोलने में दिक्कत (अस्पष्ट उच्चारण), चक्कर आना, और शरीर में झुनझुनी महसूस होना भी इसके लक्षण हो सकते हैं। महिलाओं में थकान, सुन्नता, संतुलन खोना, चक्कर आना, और मांसपेशियों में जकड़न या ऐंठन जैसे लक्षण अधिक देखे जा सकते हैं। ये सभी लक्षण हमें बताते हैं कि शरीर में कुछ तो गड़बड़ है और हमें इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

शरीर के विभिन्न हिस्सों पर इसका प्रभाव

जब माइलिन शीथ डैमेज होता है, तो इसका असर शरीर के कई हिस्सों पर पड़ सकता है, क्योंकि दिमाग से निकलने वाले संदेश ठीक से पहुँच नहीं पाते। मांसपेशियों में कमजोरी या सुन्नता अक्सर एक समय में शरीर के एक तरफ या अंगों में महसूस होती है। इससे चलने-फिरने में दिक्कत आ सकती है, कदम अस्थिर हो सकते हैं, या समन्वय (coordination) में कमी आ सकती है। मुझे याद है एक ब्लॉगर दोस्त ने बताया था कि कैसे उनके हाथों में इतनी कमजोरी आ गई थी कि वे अपना कैमरा ठीक से पकड़ भी नहीं पाते थे, जो उनके काम के लिए बहुत ज़रूरी था। यह छोटी लगने वाली दिक्कतें भी रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर बहुत गहरा असर डालती हैं। ब्लैडर, बाउल और यौन क्रिया से संबंधित समस्याएं भी मल्टीपल स्क्लेरोसिस में आम हैं। कुछ लोगों को बार-बार पेशाब आता है या उसे रोकने में दिक्कत होती है, जबकि कुछ को कब्ज या मल त्याग में समस्या हो सकती है। ये लक्षण बेहद निजी होते हैं और अक्सर लोग इनके बारे में बात करने से कतराते हैं, लेकिन सही जानकारी और डॉक्टर की सलाह से इन्हें भी मैनेज किया जा सकता है।

उपचार के नए रास्ते और प्रबंधन के तरीके

आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों का सहारा

मल्टीपल स्क्लेरोसिस का कोई स्थायी इलाज तो अभी तक नहीं मिला है, लेकिन आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में कई ऐसी दवाएं और उपचार उपलब्ध हैं जो लक्षणों को नियंत्रित करने और बीमारी की प्रगति को धीमा करने में काफी मददगार साबित हुई हैं। मेरी नज़र में, इन उपचारों से मरीज़ों के जीवन की गुणवत्ता में बहुत सुधार आया है। आमतौर पर, डॉक्टर कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स जैसी दवाएं देते हैं जो सूजन को कम करती हैं और तीव्र लक्षणों से उबरने में मदद करती हैं। इसके अलावा, रोग-संशोधित थेरेपी (DMTs) भी होती हैं, जो बीमारी के बार-बार उभरने की घटनाओं को कम करती हैं और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में नए घावों को बनने से रोकती हैं। इंजेक्शन, मौखिक दवाएं और इन्फ्यूजन थेरेपी जैसे विभिन्न DMTs उपलब्ध हैं। हाल ही में, जनवरी 2023 में ब्रूमवी (ublituximab-xiiy) और अगस्त 2023 में टायरुको (नटालिज़ुमैब-sztn) जैसी नई दवाएं भी FDA द्वारा अनुमोदित की गई हैं, जो बेहतर रोग नियंत्रण की उम्मीद जगाती हैं। सही समय पर सही इलाज मिलने से व्यक्ति एक लंबा और सक्रिय जीवन जी सकता है।

जीवनशैली में बदलाव और सहायक उपचार

दवाओं के साथ-साथ, जीवनशैली में कुछ बदलाव और सहायक उपचार भी मल्टीपल स्क्लेरोसिस के प्रबंधन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मेरे हिसाब से, यह एक समग्र दृष्टिकोण है जो बीमारी को बेहतर तरीके से समझने और उसके साथ जीने में मदद करता है। शारीरिक गतिविधि बहुत ज़रूरी है; तैराकी, चलना और योग जैसे कम प्रभाव वाले व्यायाम मांसपेशियों को लचीला रखने, संतुलन सुधारने, और थकान कम करने में मदद करते हैं। एक बार एक फ़िज़ियोथेरेपिस्ट ने मुझे बताया था कि नियमित व्यायाम से न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार होता है। गर्म पानी से नहाना या अधिक तापमान में रहना लक्षणों को बिगाड़ सकता है, इसलिए हल्के कपड़े पहनना और घर को ठंडा रखना मददगार हो सकता है। विटामिन डी का पर्याप्त स्तर बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कुछ शोध बताते हैं कि कम विटामिन डी स्तर वाले लोगों में बीमारी अधिक गंभीर होती है। संतुलित आहार, जिसमें फल, सब्जियां, और ओमेगा-3 फैटी एसिड शामिल हों, सूजन को कम करने में सहायक हो सकता है। तनाव प्रबंधन भी बेहद ज़रूरी है; माइंडफुलनेस, ध्यान, और रिलैक्सेशन तकनीकें तनाव के कारण बढ़ने वाले लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती हैं।

MS प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण सुझाव क्या करें क्या न करें
दवाएँ डॉक्टर की सलाह पर नियमित रूप से दवाएँ लें। दवाओं का सेवन कभी न छोड़ें या खुद से खुराक न बदलें।
शारीरिक गतिविधि नियमित रूप से हल्का व्यायाम जैसे योग, तैराकी करें। अधिक गर्मी या अत्यधिक थका देने वाले व्यायाम से बचें।
आहार विटामिन डी युक्त, फाइबर से भरपूर और संतुलित आहार लें। शराब, अधिक वसा वाले और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से बचें।
पर्यावरण घर को ठंडा और आरामदायक रखें। गर्म वातावरण, गर्म पानी से स्नान से बचें।
मानसिक स्वास्थ्य तनाव कम करने के लिए ध्यान, माइंडफुलनेस अपनाएं। अवसाद या चिंता को नज़रअंदाज़ न करें, मदद लें।
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भविष्य की उम्मीदें: शोध और नई खोजें

नवीनतम वैज्ञानिक अनुसंधान

मल्टीपल स्क्लेरोसिस के क्षेत्र में वैज्ञानिक लगातार शोध कर रहे हैं, और हर नई खोज हमें इस बीमारी को बेहतर ढंग से समझने और इसके इलाज के करीब ला रही है। मुझे तो लगता है कि यह बहुत उत्साहजनक है!

हाल के वर्षों में, शोधकर्ताओं ने उन प्रतिरक्षा कोशिकाओं की पहचान की है जो माइलिन पर हमला करती हैं, और उन कारकों को भी पहचाना है जो इस हमले को शुरू करते हैं। आनुवंशिकी, प्रतिरक्षा विज्ञान, और महामारी विज्ञान जैसे क्षेत्रों में व्यापक शोध चल रहा है। एक भारतीय मूल के वैज्ञानिक, डॉ.

आशुतोष मंगलम और उनकी टीम ने आंत के बैक्टीरिया ‘प्रीवोटेला’ की खोज की है, जिसका इस्तेमाल मल्टीपल स्क्लेरोसिस और इससे मिलती-जुलती बीमारियों के इलाज के लिए किया जा सकता है। उनका शोध बताता है कि आंत के अच्छे बैक्टीरिया हमारी प्रतिरक्षा कोशिकाओं के विकास में मदद करते हैं, और MS के मरीज़ों की आंतों में इनकी कमी देखी जाती है। यह एक बिल्कुल नया दृष्टिकोण है जो भविष्य के इलाज की दिशा में एक बड़ी उम्मीद जगाता है।

उभरती हुई उपचार पद्धतियाँ

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मल्टीपल स्क्लेरोसिस के इलाज में कुछ बेहद रोमांचक नई पद्धतियाँ भी सामने आ रही हैं। स्टेम सेल थेरेपी, खासकर हेमाटोपोइएटिक स्टेम सेल प्रत्यारोपण (HSCT), ने क्लिनिकल परीक्षणों में बहुत ही आशाजनक परिणाम दिखाए हैं। यह थेरेपी प्रतिरक्षा प्रणाली को “रीसेट” करके बीमारी की प्रगति को रोकने की क्षमता रखती है, खासकर MS के आक्रामक रूपों के लिए। कई नई दवाएँ भी क्लिनिकल परीक्षण में हैं, जो विभिन्न MS प्रकारों के लिए अच्छे परिणाम दिखा रही हैं, जैसे सिपोनिमोड (Siponimod) माध्यमिक प्रगतिशील MS के लिए और ओज़ानिमोड (Ozanimod)। मुझे लगता है कि यह वाकई एक गेम-चेंजर हो सकता है। इसके अलावा, टेलीमेडिसिन और रिमोट मॉनिटरिंग जैसी तकनीकी प्रगति भी MS रोगियों के लिए देखभाल तक पहुँच को आसान बना रही है। नियमित ऑनलाइन चेक-अप और डिजिटल स्वास्थ्य उपकरण मरीज़ों को अपनी स्थिति को अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में मदद करते हैं, खासकर उन लोगों के लिए जो विशेष MS क्लीनिकों से दूर रहते हैं।

मल्टीपल स्क्लेरोसिस के साथ एक बेहतर जीवन

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भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान

मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी लंबी बीमारी के साथ जीना भावनात्मक और मानसिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। मैंने कई मरीज़ों से सुना है कि उन्हें चिंता, अवसाद, तनाव और मूड स्विंग्स का सामना करना पड़ता है। ऐसे में, अपने मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना उतना ही ज़रूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य का। मुझे लगता है कि अपनों से बात करना, किसी थेरेपिस्ट से मदद लेना, या सपोर्ट ग्रुप्स से जुड़ना बहुत फ़ायदेमंद होता है। अक्सर, बस अपनी भावनाओं को व्यक्त करने से ही बहुत राहत मिलती है। योग और ध्यान जैसी माइंडफुलनेस तकनीकें तनाव को कम करने और मानसिक शांति बनाए रखने में सहायक होती हैं। याद रखें, आप अकेले नहीं हैं; बहुत सारे लोग हैं जो आपकी मदद के लिए तैयार हैं।

दैनिक जीवन को अनुकूल बनाना

मल्टीपल स्क्लेरोसिस के साथ भी एक सक्रिय और संतुष्ट जीवन जीना बिल्कुल संभव है। हमें बस कुछ चीज़ों को अपनी ज़रूरतों के हिसाब से ढालना होगा। मुझे एक महिला ने बताया कि कैसे उन्होंने अपने घर को इस तरह से व्यवस्थित किया कि उन्हें चलने-फिरने में आसानी हो – फर्नीचर को इस तरह रखा कि सहारा मिल सके, और बाथरूम में ग्रैब बार लगवाए। ये छोटी-छोटी बातें बहुत बड़ा फ़र्क डालती हैं। यदि चलने में कठिनाई होती है, तो फिजिकल थेरेपी गतिशीलता, शक्ति और समन्वय में सुधार करने में मदद कर सकती है। ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट रोज़मर्रा के कामों को आसान बनाने के तरीके सिखा सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अपनी स्थिति को समझें और अपने डॉक्टर और थेरेपी टीम के साथ मिलकर एक व्यक्तिगत योजना बनाएं। समय-समय पर अपनी उपचार योजना में बदलाव करना पड़ सकता है, क्योंकि MS एक विकसित होने वाली स्थिति है। अपनी देखभाल करें, सूचित रहें, और समय पर चिकित्सा सहायता लेते रहें, इससे आप इस स्थिति को बेहतर तरीके से प्रबंधित कर पाएंगे।

हमेशा स्वस्थ रहें, खुश रहें!

글 को समाप्त करते हुए

मल्टीपल स्क्लेरोसिस (MS) एक ऐसी चुनौती है जिसका सामना करना मुश्किल ज़रूर लग सकता है, लेकिन सही जानकारी, समय पर इलाज और जीवनशैली में उचित बदलावों के साथ इसे बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है। मेरा यह व्यक्तिगत अनुभव रहा है कि धैर्य और सकारात्मकता बनाए रखने से यह सफ़र थोड़ा आसान हो जाता है। मुझे उम्मीद है कि इस पोस्ट से आपको MS को समझने में मदद मिली होगी और आपने यह जाना होगा कि कैसे आप या आपके आस-पास के लोग इस स्थिति के साथ एक सक्रिय और संतोषजनक जीवन जी सकते हैं। हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि ज्ञान ही शक्ति है, और जब हम अपनी बीमारी को समझते हैं, तो हम उसके प्रबंधन के लिए सशक्त महसूस करते हैं।

जानने लायक उपयोगी जानकारी

1. मल्टीपल स्क्लेरोसिस के शुरुआती लक्षणों को कभी नज़रअंदाज़ न करें, क्योंकि जल्द पहचान और उपचार से बीमारी की प्रगति को धीमा किया जा सकता है।

2. विटामिन डी का पर्याप्त स्तर बनाए रखना महत्वपूर्ण है; अपने डॉक्टर से बात करके सप्लीमेंट्स या डाइट में बदलाव पर विचार करें।

3. नियमित शारीरिक गतिविधि, जैसे कि योग या तैराकी, मांसपेशियों को मजबूत रखने और थकान को कम करने में सहायक होती है।

4. तनाव प्रबंधन तकनीकों को अपनाएं, क्योंकि तनाव MS के लक्षणों को बढ़ा सकता है। माइंडफुलनेस और ध्यान बहुत उपयोगी हो सकते हैं।

5. अपने डॉक्टर और चिकित्सा टीम के साथ निरंतर संपर्क में रहें और अपनी उपचार योजना को समय-समय पर अपडेट करवाते रहें।

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महत्वपूर्ण बातों का सारांश

मल्टीपल स्क्लेरोसिस एक जटिल ऑटोइम्यून बीमारी है जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है, लेकिन अब इसके प्रबंधन के लिए कई प्रभावी तरीके उपलब्ध हैं। इसका निदान अक्सर शुरुआती, कभी-कभी अस्पष्ट, लक्षणों जैसे दृष्टि समस्याओं, थकान, सुन्नता, और संतुलन बिगड़ने के आधार पर किया जाता है। आधुनिक चिकित्सा में कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स और रोग-संशोधित थेरेपी (DMTs) जैसी दवाएं बीमारी के हमलों को कम करने और उसकी प्रगति को धीमा करने में मदद करती हैं, जिनमें हाल ही में अनुमोदित ब्रूमवी और टायरुको जैसे नए विकल्प भी शामिल हैं। मेरा मानना है कि दवाओं के साथ-साथ जीवनशैली में बदलाव, जैसे कि नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, और तनाव प्रबंधन भी इस बीमारी के साथ बेहतर जीवन जीने के लिए बहुत ज़रूरी हैं। अत्यधिक गर्मी से बचना और पर्याप्त विटामिन डी स्तर बनाए रखना भी लक्षणों को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है।

इसके अतिरिक्त, शोधकर्ता लगातार नए उपचार और निदान के तरीके खोज रहे हैं, जिसमें आंत के बैक्टीरिया ‘प्रीवोटेला’ और स्टेम सेल थेरेपी जैसी आशाजनक पद्धतियाँ शामिल हैं। यह सब मिलकर MS के रोगियों के लिए एक उज्जवल भविष्य की उम्मीद जगाता है। भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है; सपोर्ट ग्रुप्स और थेरेपी के माध्यम से सहायता प्राप्त करना इस सफ़र को आसान बना सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अपनी स्थिति को पूरी तरह से समझें, अपने डॉक्टरों के साथ मिलकर एक व्यक्तिगत उपचार योजना बनाएँ, और आवश्यकतानुसार उसमें बदलाव करने में संकोच न करें। एक सक्रिय और अच्छी तरह से सूचित दृष्टिकोण के साथ, MS के साथ भी एक पूर्ण और सार्थक जीवन जीना संभव है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) 📖

प्र: मल्टीपल स्क्लेरोसिस के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं और इसका पता कैसे चलता है?

उ: अरे दोस्तों, मल्टीपल स्क्लेरोसिस (MS) एक ऐसी बीमारी है जिसके लक्षण अक्सर शुरुआत में इतने हल्के होते हैं कि हम उन्हें नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जैसे मुझे भी कभी-कभी लगा था कि बस थकान है या आँखें ज़रा धुँधली हो गई हैं.
लेकिन सच कहूँ, ये कोई मामूली बात नहीं है. इसके कुछ आम लक्षण हैं जैसे कि थकान जो कितनी भी नींद ले लो, जाती ही नहीं. फिर शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन या झुनझुनी, या फिर चलने-फिरने में थोड़ी दिक्कत महसूस होना.
कभी-कभी चीज़ें धुंधली दिख सकती हैं, या बोलने में थोड़ी परेशानी हो सकती है. मेरे एक दोस्त ने बताया था कि उसे अचानक से लगा कि उसके पैरों में जान ही नहीं है.
अब बात आती है कि इसका पता कैसे चलता है. सबसे पहले, डॉक्टर आपसे आपकी पिछली स्वास्थ्य स्थिति और लक्षणों के बारे में विस्तार से पूछेंगे. फिर वे कुछ न्यूरोलॉजिकल टेस्ट करेंगे जिससे आपकी नसों की कार्यक्षमता की जाँच होगी.
इसके बाद, एक एमआरआई (MRI) स्कैन ज़रूर करवाते हैं, खासकर दिमाग और रीढ़ की हड्डी का, जिससे MS से जुड़े घावों या प्लेक्स का पता चलता है. कुछ मामलों में, स्पाइनल टैप (लुंबर पंचर) करके सेरेब्रोस्पाइनल फ्लुइड की जाँच भी की जाती है.
ये सब मिलकर ही डॉक्टर को सही निदान तक पहुँचने में मदद करते हैं. मुझे याद है, जब मेरे एक जानने वाले का निदान हुआ था, तो शुरुआती संदेह के बाद एमआरआई ने ही तस्वीर साफ़ की थी.
इसलिए, अगर आपको ऐसे कोई भी लक्षण महसूस होते हैं, तो देर मत कीजिए, तुरंत डॉक्टर से मिलिए!

प्र: मल्टीपल स्क्लेरोसिस के इलाज के लिए आजकल कौन-कौन से नए तरीके उपलब्ध हैं?

उ: दोस्तों, अच्छी खबर ये है कि मल्टीपल स्क्लेरोसिस के इलाज में आजकल बहुत तरक्की हुई है! जब मैंने पहली बार इस बीमारी के बारे में सुना था, तो लगता था कि पता नहीं क्या होगा, लेकिन अब उम्मीदें बहुत हैं.
पहले सिर्फ लक्षणों को कंट्रोल करने पर ज़ोर था, पर अब ऐसी दवाएं आ गई हैं जो बीमारी की प्रगति को धीमा कर सकती हैं और हमलों की संख्या कम कर सकती हैं. इन्हें ‘डिजीज-मॉडिफाइंग थेरेपीज़’ (DMTs) कहते हैं.
ये दवाएं कई तरह की हैं, कुछ इंजेक्शन के रूप में तो कुछ गोलियों के रूप में ली जाती हैं, और कुछ तो इन्फ्यूजन के ज़रिए दी जाती हैं. इसके अलावा, लक्षणों को मैनेज करने के लिए भी कई तरीके हैं.
जैसे, थकान के लिए दवाएं, मांसपेशियों की ऐंठन के लिए फिजियोथेरेपी और दवाएं, और दर्द के लिए पेन मैनेजमेंट. मुझे लगता है कि सबसे ज़रूरी है अपने डॉक्टर के साथ मिलकर एक ऐसा प्लान बनाना जो आपकी ज़रूरतों के हिसाब से हो.
हाल ही में कुछ नए शोध भी हुए हैं जो स्टेम सेल थेरेपी और नई पीढ़ी की दवाओं पर काम कर रहे हैं, जो भविष्य में और भी बेहतर विकल्प ला सकती हैं. मेरे एक जानकार ने हाल ही में एक नई DMT शुरू की है और वह पहले से ज़्यादा बेहतर महसूस कर रहा है.
यह दिखाता है कि सही इलाज से ज़िंदगी बहुत बदल सकती है.

प्र: मल्टीपल स्क्लेरोसिस के साथ रोज़मर्रा की ज़िंदगी कैसे जिएं और इसके लिए क्या जीवनशैली अपनाएं?

उ: देखो यार, मल्टीपल स्क्लेरोसिस के साथ जीना आसान नहीं है, लेकिन नामुमकिन भी नहीं है. मैंने कई ऐसे लोगों को देखा है जिन्होंने MS के बावजूद अपनी ज़िंदगी को भरपूर जिया है.
सबसे पहली बात तो ये कि अपनी बीमारी को समझो और स्वीकार करो. उसके बाद, अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव करना बहुत ज़रूरी है. स्वस्थ खाना बहुत अहम है; ताज़े फल, सब्ज़ियां, साबुत अनाज और कम वसा वाला भोजन शरीर को ऊर्जा देता है.
मुझे लगता है कि तला-भुना खाने से बचना चाहिए. हाँ, पता है थकान बहुत होती है, लेकिन हल्की-फुल्की कसरत, जैसे चलना, योग, या तैराकी, मांसपेशियों को मज़बूत रखती है और मूड भी अच्छा करती है.
मेरे एक दोस्त को जब बहुत थकान होती है, तो वो बस थोड़ी देर टहल लेता है और उसे फ़र्क महसूस होता है. तनाव MS के लक्षणों को और बढ़ा सकता है, इसलिए इसे कम करना बहुत ज़रूरी है.
मेडिटेशन, गहरी साँस लेने के व्यायाम, या अपनी पसंद का कोई काम करना इसमें मदद कर सकता है. नींद की कमी थकान को बढ़ाती है, इसलिए हर रात 7-8 घंटे की गहरी नींद लेने की कोशिश करो.
अपने डॉक्टर से लगातार संपर्क में रहो और उनकी सलाह मानो. किसी भी नए लक्षण या बदलाव पर ध्यान दो. याद रखो, आप अकेले नहीं हो.
ऐसे कई सपोर्ट ग्रुप्स हैं जहाँ आप दूसरे MS रोगियों से जुड़ सकते हो और अपनी बातें शेयर कर सकते हो. एक-दूसरे का साथ और सकारात्मक सोच, इस यात्रा को थोड़ा आसान बना देती है.
मैंने खुद महसूस किया है कि जब हम अपनी देखभाल ठीक से करते हैं, तो बीमारी हमें पूरी तरह से नहीं हरा सकती.